कुरान मुस्लिम धर्म का बहुत ही पवित्र ग्रंथ है। कुरान में वह सब आयतें यानी कि पद शुमार है। जो मुहम्मद साहब के मुँह से उस समय निकले थे जब वो पुरे तरह से अल्लाह की प्रेरणा में डूबे हुए थे। अगर हम इस्लामिक मान्यताओं के मुताबिक़ माने तो यह वो आयते है जो देवदूतों के जरिए मुहम्मद साहब तक पहुंचाते थे। कहा जाता है इन्ही पवित्र आयातों का ही संकलन कुरान है। कुरान में जो भी आयतें है वह पैगम्बर को 23 सालों तक वक़्त-वक़्त पर हासिल हुई थी।

जिनको उन्होंने कभी लड़कियों तो कभी तालपत्रों पर संकलित किया जाता है। इन 23 सालों के अंदर पैगंबर 13 साल पवित्र मक्का और 10 साल मदीने में रहे। उनके बाद में पहले खलीफा अबूबक्र ने मुहम्मद साहब की संकलित इन सारी आयतों का संपादन किया एवं पवित्र कुरान तैयार की जो कि प्रामाणिक मानी जाती है।

कौन होते है पैगंबर, नबी और रसूल?

  • समाधि की अवस्था में इस्लाम धर्म के दर्शन होने से मुहम्मद साहब को पैगंबर नबी और रसूल भी पुकारा जाता है।
  • पैगंबर का मतलब होता है जो पैगाम देके जाता है। चूंकि मुहम्मद साहब के मार्फत ईश्वर के संदेश धरती पर पहुंचे। इसलिए वे पैगम्बर माने गए।
  • दिव्य ज्ञान को उजागर करने वाला नबी होता है, पैगम्बर के भी ऐसा ही करने से वे नबी हुए।
  • रसूल का मतलब भी भेजा हुआ या दूत होता है। मुहम्मद साहब भी ईश्वर और इंसानों के बीच धर्म के दूत बने।

इस्लाम धर्म के कौनसे 5 कर्तव्य है?

जो लोग इस्लाम धर्म को मानते है उनको जरुरी होता है कि 5 धार्मिक कर्तव्य जरूर माने। जाने वह कौनसे है –

कलमा पढ़ने ला इलाह इल्लललाह मुहम्मदुर्ररसूलल्लाह। इस मूल मन्त्र के जरिए यह मानना है कि स्मरण करना बोलना कि अल्लाह एक है और मुहम्मद साहब उनके रसूल है। इनका मानना है कि अल्लाह एक ही है और इसी सिद्धांत यानी कि तौहीद की बुनियाद सही मूल सूत्र है।

नमाज : रोजाना 5 बार अल्लाह से प्रार्थना करना। इसे सलात भी कहा जाता है। इस बात से सब वाकिफ है कि रोजा रखना इस्लाम धर्म का सबसे पवित्र महीना होता है रमजान। रमजान के महीने में पुरे महीने भर केवल सूर्यास्त के बाद में एक बार खाना खाने का नियम होता है। ऐसी मान्यता है कि इस पवित्र महीने में ही कुरान उतरी थी। 

जकात- सालाना आमदनी का एक नियत हिस्सा करीबन ढाई प्रतिशत तक दान करना होता है।

हज- इस्लाम धर्म के पवित्र तीर्थ स्थानों मक्का और मदीना की यात्रा।

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